মহাকাল ভৈরব

মহাকাল ভৈরব
ওঁ নমঃ মহাকাল ভৈরবায়

Tuesday, 6 March 2018

মহাকাল ভৈরব



॥ दोहा ॥
श्री गणपति, गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ ।
चालीसा वन्दन करों, श्री शिव भैरवनाथ ॥
श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल ।
श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल ॥
|| चौपाई ||
जय जय श्री काली के लाला । जयति जयति काशी-कुतवाला ॥
जयति बटुक भैरव जय हारी । जयति काल भैरव बलकारी ॥
जयति सर्व भैरव विख्याता । जयति नाथ भैरव सुखदाता ॥
भैरव रुप कियो शिव धारण । भव के भार उतारण कारण ॥
भैरव रव सुन है भय दूरी । सब विधि होय कामना पूरी ॥
शेष महेश आदि गुण गायो । काशी-कोतवाल कहलायो ॥
जटाजूट सिर चन्द्र विराजत । बाला, मुकुट, बिजायठ साजत ॥
कटि करधनी घुंघरु बाजत । दर्शन करत सकल भय भाजत ॥
जीवन दान दास को दीन्हो । कीन्हो कृपा नाथ तब चीन्हो ॥
वसि रसना बनि सारद-काली । दीन्यो वर राख्यो मम लाली ॥
धन्य धन्य भैरव भय भंजन । जय मनरंजन खल दल भंजन ॥
कर त्रिशूल डमरु शुचि कोड़ा । कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा ॥
जो भैरव निर्भय गुण गावत । अष्टसिद्घि नवनिधि फल पावत ॥
रुप विशाल कठिन दुख मोचन । क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥
अगणित भूत प्रेत संग डोलत । बं बं बं शिव बं बं बोतल ॥
रुद्रकाय काली के लाला । महा कालहू के हो काला ॥
बटुक नाथ हो काल गंभीरा । श्वेत, रक्त अरु श्याम शरीरा ॥
करत तीनहू रुप प्रकाशा । भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥
रत्न जड़ित कंचन सिंहासन । व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ॥
तुमहि जाई काशिहिं जन ध्यावहिं । विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय । जय उन्नत हर उमानन्द जय ॥
भीम त्रिलोकन स्वान साथ जय । बैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥
महाभीम भीषण शरीर जय । रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय ॥
अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय । श्वानारुढ़ सयचन्द्र नाथ जय ॥
निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय । गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥
त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय । क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय । कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥
रुद्र बटुक क्रोधेश काल धर । चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥
करि मद पान शम्भु गुणगावत । चौंसठ योगिन संग नचावत ॥
करत कृपा जन पर बहु ढंगा । काशी कोतवाल अड़बंगा ॥
देयं काल भैरव जब सोटा । नसै पाप मोटा से मोटा ॥
जाकर निर्मल होय शरीरा । मिटै सकल संकट भव पीरा ॥
श्री भैरव भूतों के राजा । बाधा हरत करत शुभ काजा ॥
ऐलादी के दुःख निवारयो । सदा कृपा करि काज सम्हारयो ॥
सुन्दरदास सहित अनुरागा । श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥
श्री भैरव जी की जय लेख्यो । सकल कामना पूरण देख्यो ॥
॥ दोहा ॥
जय जय जय भैरव बटुक, स्वामी संकट टार ।
कृपा दास पर कीजिये, शंकर के अवतार ॥
जो यह चालीसा पढ़े, प्रेम सहित सत बार ।
उस घर सर्वानन्द हों, वैभव बड़े अपार ॥




Tuesday, 7 November 2017

অত্যন্ত গোপনীয় ভৈরব মন্ত্র




ॐ गुरु जी सत नाम आदेश आदि पुरुष को। काला भैरूं गौरा भैरूं, भैरूं रंग बिरंगा। शिव-गौरां को जब-जब ध्याऊं भैरूं आवे पास। पूरण होय मनसा वाचा, पूरण होय आस। लक्ष्मी ल्यावे घर आंगन में, जिह्वा विराजे सुर की देवी, खोल घड़ा दे दड़ा। काला भैरूं खप्पर राखे, गौरा झांझर पांव। लाल भैरूं पीला भैरूं, पगां लगावे गांव। दशों दिशाओं में पंच-पंच भैरूं, पहरा लगावे आप। दोनों भैरूं मेरे संग में चाले, बम-बम करते जाप। बावन भैरूं मेरे सहाय हो, गुरु रूप से, धर्म रूप से, सत्य रूप से, मर्यादा रूप से, देव रूप से, शंकर रूप से, माता-पिता रूप से, लक्ष्मी रूप से, सम्मान सिद्धि रूप से, स्व कल्याण जन कल्याण हेतु सहाय हो। श्रीशिव-गौरां पुत्र भैरूं। शब्द साचा पिण्ड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा।
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सिद्धि की दृष्टि से इस मन्त्र का विधि विधान अलग है, परन्तु साधारण रूप में मात्र 11 बार रोज जपने की आज्ञा है। श्री शिव पुत्र भैरव आपकी सहायत करेंगे। चार लड्डू बूंदी के, मन्त्र बोलकर 7 रविवार को काले कुत्ते को खिलाएं।
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।। प्रयोग व विधि ।।
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सर्व-कार्य सिद्ध करने वाला यह मंत्र अत्यन्त गुप्त और अत्यन्त प्रभावी है। इस मंत्र से केवल परोपकार के कार्य करने चाहिए, उक्त मन्त्र का अनुष्ठान शनि या रविवार से प्रारम्भ करना चाहिए। एक पत्थर का तीन कोने वाला टुकड़ा लेकर उसे एकान्त में स्थापित भी करें। उसके ऊपर तेल-सिन्दूर का लेप करें। पान और नारियल भेंट में चढ़ाए। नित्य सरसों के तेल का दीपक जलाए। दीपक अखण्ड रहे, तो अधिक उत्तम फल होगा। मन्त्र को नित्य 27 बार जपे। चालिस दिन तक जप करें। इस प्रकार उक्त मन्त्र सिद्ध हो जाता है। नित्य जप के बाद छार, छबीला, कपूर, केसर और लौंग की आहुति देनी चाहिए। भोग में बाकला, बाटी रखनी चाहिए। जब भैरव दर्शन दें, तो डरें नहीं, भक्ति-पूर्वक प्रणाम करें और उड़द के बने पकौड़े, बेसन के लड्डू तथा गुड़ मिला कर दूध बलि में अर्पित करें। मन्त्र में वर्णित सभी कार्य सिद्ध होते हैं।


Thursday, 16 February 2017

মহাকাল

  


মহাকাল 








                                                     মহাকালী

ওঁ করাল বদনাং ঘোরাং মুক্তকেশীং চতুরভুজাং , কালিকাং দক্ষিণং দিব্যাং মুণ্ডমালাবিভুসিতাম ।
সদ্যছিন্নশিরঃ খরগ বামাধকরাম্বুজাম , অভয়ং বরদঞ্চইব  দক্ষিণোরদ্ধধ পানিকম ।
মহামেঘপ্রভাং শ্যামাং তথা চৈব দিগম্বরীম , কণ্ঠাবসত্তমুণ্ডালি গল দ্রুধির চচ্চিতাম ।