ॐ गुरु जी सत नाम आदेश आदि पुरुष को। काला भैरूं गौरा भैरूं, भैरूं रंग बिरंगा। शिव-गौरां को जब-जब ध्याऊं भैरूं आवे पास। पूरण होय मनसा वाचा, पूरण होय आस। लक्ष्मी ल्यावे घर आंगन में, जिह्वा विराजे सुर की देवी, खोल घड़ा दे दड़ा। काला भैरूं खप्पर राखे, गौरा झांझर पांव। लाल भैरूं पीला भैरूं, पगां लगावे गांव। दशों दिशाओं में पंच-पंच भैरूं, पहरा लगावे आप। दोनों भैरूं मेरे संग में चाले, बम-बम करते जाप। बावन भैरूं मेरे सहाय हो, गुरु रूप से, धर्म रूप से, सत्य रूप से, मर्यादा रूप से, देव रूप से, शंकर रूप से, माता-पिता रूप से, लक्ष्मी रूप से, सम्मान सिद्धि रूप से, स्व कल्याण जन कल्याण हेतु सहाय हो। श्रीशिव-गौरां पुत्र भैरूं। शब्द साचा पिण्ड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा।
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सिद्धि की दृष्टि से इस मन्त्र का विधि विधान अलग है, परन्तु साधारण रूप में मात्र 11 बार रोज जपने की आज्ञा है। श्री शिव पुत्र भैरव आपकी सहायत करेंगे। चार लड्डू बूंदी के, मन्त्र बोलकर 7 रविवार को काले कुत्ते को खिलाएं।
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।। प्रयोग व विधि ।।
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सर्व-कार्य सिद्ध करने वाला यह मंत्र अत्यन्त गुप्त और अत्यन्त प्रभावी है। इस मंत्र से केवल परोपकार के कार्य करने चाहिए, उक्त मन्त्र का अनुष्ठान शनि या रविवार से प्रारम्भ करना चाहिए। एक पत्थर का तीन कोने वाला टुकड़ा लेकर उसे एकान्त में स्थापित भी करें। उसके ऊपर तेल-सिन्दूर का लेप करें। पान और नारियल भेंट में चढ़ाए। नित्य सरसों के तेल का दीपक जलाए। दीपक अखण्ड रहे, तो अधिक उत्तम फल होगा। मन्त्र को नित्य 27 बार जपे। चालिस दिन तक जप करें। इस प्रकार उक्त मन्त्र सिद्ध हो जाता है। नित्य जप के बाद छार, छबीला, कपूर, केसर और लौंग की आहुति देनी चाहिए। भोग में बाकला, बाटी रखनी चाहिए। जब भैरव दर्शन दें, तो डरें नहीं, भक्ति-पूर्वक प्रणाम करें और उड़द के बने पकौड़े, बेसन के लड्डू तथा गुड़ मिला कर दूध बलि में अर्पित करें। मन्त्र में वर्णित सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

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